Type Here to Get Search Results !

शिक्षा देने से पहले- Shiksha Dene Se Pahle | Hindi Kahaniya

सात वर्षीय बालक को माँ पीटे जा रही थी। पड़ोस की एक महिला ने जाकर बचाया उसे। पूछने पर उसकी माँ ने बताया कि यह मंदिर में से चढ़ौती के आम तथा पैसे चुराकर लाया है, इसीलिए पीट रही हूँ इसे । 



उक्त महिला ने बड़े प्यार से उस बच्चे से पूछा, "क्यों बेटा ! तुम तो बड़े प्यारे बालक हो। चोरी तो गंदे बच्चे करते हैं। तुमने ऐसा क्यों किया ?"


बार-बार पूछने पर सिसकियों के बीच से बालक बोला, "माँ भी तो रोज ऊपर वाले चाचा जी के दूध में से दूध निकाल लेती है और उतना ही पानी डाल देती है तथा हमसे कहती है कि उन्हें बताना मत। मैंने तो आज पहली बार ही चोरी की है।"


महिला के मुँह की आभा देखते ही बनती थी उस समय। 


एक महिला ने अपना एक अनुभव साझा किया है : "मेरे दो बेटे हैं और दोनों ही संस्कारी हैं । बड़े बेटे को हमनें तीन साल से कुछ कम उम्र में ही एक अच्छे और प्रतिष्ठित स्कूल में दाखिल कर दिया ।एक दिन स्कूल से शिकायत आनें पर हम वहां पहुंचे तो प्रिंसिपल साहिबा ने हमें बताया कि """आपका बेटा हाँथ में एक लकड़ी लेकर एक बच्चे को धमका रहा था, मैंने सोचा कि आपसे मिलकर पता करें कि आप जहां रहते हैं क्या यह उस माहौल की वजह से है, या फिर आप खुद तो कहीं किसी ऐसी गतिविधियों में शामिल,,,, अब हम दोनों एक दूसरे को देखकर शर्मिंदा हुए जा रहे थे जबकि हमारे घर में पूजा पाठ वाला माहौल था और वह जगह भी अच्छी थी जहां हम रहते थे । हम घर आए और शान्ति से उससे वार्तालाप किया बातचीत कुरेदते हुये पता चला कि रविवार को जो मूवी हम देखने गए थे उसे साथ लेकर, यह उसका ही असर था ।"


वास्तव में बच्चों के निर्माण में घर का वातावरण बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। कोई भी अच्छी आदत हो ,उसको शुरू से ही बच्चों में डालना बहुत जरूरी होता है। बाद में देर हो जाती है यह बात बिल्कुल सही है।


जिस प्रकार हम कोई पौधा लगाते हैं तो उसके लिए शुरू से ही अच्छी मिट्टी ,खाद ,हवा ,धूप और पानी सब का ध्यान रखते हैं तभी वह पौधा उत्तम श्रेणी का तैयार होता है ।इसके विपरीत यदि पहले हम साधारण ढंग से पौधे को छोड़ देंगे ,जब वह थोड़ा बड़ा हो जाए और हमें लगे कि उसका विकास ठीक नहीं है तब प्रयास करने पर वह बात नहीं आ पाएगी जो कि ध्यान रखें उगाए गए पौधे में होती है।


ध्यान रखें, अच्छी आदतें हमेशा शुरू से बचपन में ही डालने पर पड़ती हैं। एक बार समझदार हो जाने के बाद बच्चों के लिए अपनी आदतों को ,चाहे वह खराब हों ,बदलना बहुत मुश्किल हो जाता है।


इसलिए बचपन से ही उचित नींव डालिए। गलत आदतों को अभी बच्चा है सोच कर मत बर्दाश्त करिए अन्यथा बहुत देर हो जाएगी।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.