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राजा की कटी अंगुली और मंत्री की बात — हर मुश्किल के पीछे छिपा फायदा

हर घटना के पीछे छिपा होता है भला 

एक समय की बात है, किसी राज्य में विक्रम नाम का एक राजा राज करता था। एक दिन तलवारबाज़ी का अभ्यास करते हुए उसकी उंगली पर गहरी चोट लग गई और खून बहने लगा।

पास खड़े उसके प्रधानमंत्री सुबुद्धि ने तुरंत कहा, "महाराज, घबराइए मत। जो भी होता है, अच्छे के लिए ही होता है।"

राजा की कटी अंगुली और मंत्री की बात — हर मुश्किल के पीछे छिपा फायदा


ये सुनते ही राजा आग-बबूला हो गया। उसे लगा कि उसके दर्द पर मंत्री मज़ाक उड़ा रहा है। गुस्से में उसने हुक्म दिया कि मंत्री को कारागार में डाल दिया जाए और अगले दिन फांसी दे दी जाए।

मंत्री घबराया नहीं, बल्कि विनम्रता से बोला, "महाराज, मैंने वर्षों आपकी सेवा की है। क्या मेरी एक आखिरी इच्छा पूरी नहीं करेंगे?"

राजा ने पूछा, "बोलो, क्या चाहिए तुम्हें?"

"बस दस दिन का समय दे दीजिए, महाराज। उसके बाद जो सज़ा चाहें, दे दीजिएगा," मंत्री ने कहा।

राजा ने इच्छा मान ली।

अगले ही दिन राजा अपने सैनिकों के साथ शिकार खेलने जंगल में निकला। घने जंगल में वो अपने साथियों से बिछड़ गया और भटकते-भटकते एक वनवासी कबीले के इलाके में जा पहुँचा। संयोग से उस दिन वो लोग वन-देवी को बलि चढ़ाने के लिए किसी इंसान की तलाश में थे। उन्होंने राजा को पकड़ लिया और बलि-स्थल की ओर ले चले।

सारी तैयारियाँ पूरी हो चुकी थीं, तभी वहाँ खड़े एक बुज़ुर्ग वनवासी की नज़र राजा की घायल उंगली पर पड़ी। उसने तुरंत रोका, "ये तो अंगहीन है, इसकी बलि नहीं दी जा सकती!" नियम के अनुसार वनवासियों ने राजा को छोड़ दिया।

किसी तरह राह ढूंढते हुए राजा अपने राज्य लौटा। महल पहुँचते ही सबसे पहले वो कारागार गया, मंत्री से मिलने।

राजा ने भावुक होकर कहा, "तुमने सच कहा था। अगर मेरी उंगली न कटी होती, तो आज मैं जीवित न होता। सच में, जो होता है अच्छे के लिए ही होता है।"

फिर राजा ने पूछा, "मुझे तो फायदा हो गया, पर तुम्हें तो मैंने सज़ा दी, बिना किसी वजह के। तुम्हारा क्या भला हुआ इसमें?"

मंत्री मुस्कुराया और बोला, "महाराज, मैं हमेशा आपके साथ शिकार पर जाता हूँ। अगर उस दिन भी साथ होता, तो अंगहीन न होने के कारण बलि तो मेरी ही चढ़ती। तो देखिए, मेरे कारागार में रहने में भी मेरी भलाई ही छिपी थी।"

ये सुनकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ, लेकिन साथ ही उसे इस बात का अफ़सोस भी हुआ कि उसने एक छोटी सी बात पर अपने वफादार मंत्री को इतनी बड़ी सज़ा दे दी थी। राजा ने तुरंत मंत्री को कारागार से रिहा किया और उसे फिर से अपने साथ राजकाज में शामिल कर लिया।

शिक्षा: जीवन में जो भी उतार-चढ़ाव आते हैं, हर घटना के पीछे कोई न कोई कारण छिपा होता है। किसी बात के मन-मुताबिक न होने पर निराश होने की बजाय, हर परिस्थिति को सकारात्मक नज़रिए से देखना चाहिए — क्योंकि सच में, जो होता है, अच्छे के लिए ही होता है।

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