जब मैं बूढ़ा हो जाऊँगा
जिस दिन मैं सचमुच बूढ़ा हो जाऊँ, एकदम कमज़ोर और जर्जर — क्या उस दिन तू मेरे पास थोड़ा वक़्त बिताएगा? मुझसे थोड़ा धीरज रखेगा न?
हो सकता है तेरे महँगे काँच के बर्तन मेरे काँपते हाथों से छूट जाएँ, या खाने की थाली टेबल पर उलट जाए — उस वक़्त शायद मुझे साफ दिखाई भी न दे। प्लीज़, मुझ पर चिल्लाना मत। हम बूढ़े लोग वैसे भी हर पल यह डर लिए जीते हैं कि कहीं हम बोझ न बन जाएँ, तुझे इसका एहसास है क्या?
एक दिन ऐसा भी आएगा जब कान से सुनाई देना कम हो जाएगा, तेरी बात एक बार में समझ नहीं आएगी — पर इसके लिए मुझे बहरा मत कह देना। बस थोड़ी हिम्मत करके वही बात दोबारा कह देना, या कागज़ पर लिख देना। मुझे माफ़ कर देना, ये तो कुदरत का नियम है, मैं इसमें क्या कर सकता हूँ।
जब मेरे घुटने काँपने लगेंगे और पैर शरीर का बोझ उठाने से मना कर देंगे, तब क्या तू सब्र से मुझे उठ खड़े होने में सहारा देगा — ठीक वैसे ही जैसे तूने मेरी उँगली थामकर पहला कदम रखना सीखा था?
शायद मैं टूटे हुए रिकॉर्ड की तरह बार-बार वही बातें दोहराऊँ — तब थोड़ा धैर्य रखकर सुन लेना, मेरा मज़ाक मत बनाना, मेरी बातों से चिढ़ मत जाना। याद है, बचपन में तू एक गुब्बारे के लिए मेरे कान के पास घंटों भुनभुनाता रहता था, जब तक मैं वो दिला न देता?
मेरे शरीर से आती बुढ़ापे की गंध को भी सह लेना, नहाने के लिए ज़बर्दस्ती मत करना। उस वक़्त शरीर बहुत नाज़ुक हो जाएगा, थोड़ा-सा पानी लगते ही ठंड लग जाएगी। मुझे देखकर नाक मत सिकोड़ना — याद है, कभी तू भी नहाना नहीं चाहता था और मैं तेरे पीछे भागता रहता था?
विश्वास कर, बुढ़ापा ऐसा ही होता है। शायद एक दिन तुझे भी ये बात समझ आएगी।
अगर तेरे पास थोड़ा वक़्त हो, तो बस हम कुछ पल साथ बैठकर बातें कर लें, बस इतना ही। पूरा दिन मैं अकेला रहता हूँ, अकेलेपन में समय काटना आसान नहीं होता। मुझे मालूम है तू अपनी ज़िंदगी में व्यस्त रहेगा, मेरी पुरानी-सी बातें शायद अच्छी भी न लगें, फिर भी बस थोड़ी देर मेरे पास बैठ जाना।
याद है, कभी मैं घंटों तेरी नन्ही-सी बातें सुना करता था, तू बोलता रहता और मैं सुनता रहता। मैं भी तुझे कितनी कहानियाँ सुनाया करता था। एक दिन जब मैं बिस्तर पर पड़ा रहूँ, तो थोड़ी देखभाल कर देना।
अगर ग़लती से बिस्तर या चादर गंदी कर दूँ, तो माफ़ कर देना — बस अपने आख़िरी वक़्त में मुझे अकेला मत छोड़ना। जब वो घड़ी आए, तो मेरा हाथ अपनी मुट्ठी में थाम लेना, थोड़ी हिम्मत दे देना, ताकि मैं बिना डरे इस दुनिया को अलविदा कह सकूँ।
फ़िक्र मत करना — जब मैं अपने ईश्वर के सामने जाऊँगा, तो उनसे बस इतना कहूँगा कि तेरा भला करें, तुझे हर मुश्किल से बचाएँ — क्योंकि तूने मुझसे प्यार किया, मेरे बुढ़ापे में मेरा साथ निभाया।
मैं तुझसे बहुत प्यार करता हूँ। तू हमेशा खुश रहना, अच्छे से रहना — इससे ज़्यादा मैं और क्या कह सकता हूँ, क्या दे सकता हूँ भला।


