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सास का बदला नजरिया – एक भावुक सास-बहू कहानी

 सुनीता जब ब्याह कर इस घर में आई, तो सास कमला जी का व्यवहार शुरू से ही रूखा था। हर बात पर ताने, हर काम में कमी निकालना जैसे उनकी आदत बन चुकी थी।

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"मेरे जमाने की बहुएं ऐसी नहीं होती थीं," ये वाक्य कमला जी हर दूसरे दिन दोहरातीं। सुनीता चुपचाप सब सुन लेती, कभी जवाब नहीं देती।

समय बीता। एक दिन कमला जी अचानक बीमार पड़ गईं। डॉक्टरों ने कहा, कुछ महीनों तक लगातार देखभाल चाहिए। बेटा नौकरी की वजह से बाहर था, तो पूरी जिम्मेदारी सुनीता पर गई।

सुनीता ने बिना किसी शिकायत के दिन-रात एक कर दिए। समय पर दवाई, हल्का खाना, रात में जागकर सेवासब कुछ बिना थके करती रही।

एक रात कमला जी की नींद खुली तो देखा सुनीता उनके पैर दबा रही है और खुद आधी नींद में झूल रही है। कमला जी की आँखों में आंसू गए। उन्होंने पहली बार सुनीता का हाथ पकड़कर कहा, "बेटी, मैंने तुझे कभी अपनाया नहीं, फिर भी तूने मुझे कभी पराया नहीं समझा। मुझे माफ कर दे।"

उस दिन के बाद घर का माहौल पूरी तरह बदल गया। कमला जी अब सुनीता को बेटी कहकर बुलाती थीं, और सुनीता के चेहरे पर वो सुकून था जो सालों से गायब था।

सीख: रिश्तों में सच्चाई और सेवा देर-सबेर दिल जीत ही लेती है। बदला लेने से बेहतर है, अपने व्यवहार से लोगों का दिल बदलना।

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