Type Here to Get Search Results !

उफ्फ ये महिलाये भी न...? Women Power

उफ्फ ये महिलाये भी न...?

दो मिनट की आरामदायक और 
बच्चों के पसंद की ज़ायकेदार मैगी को छोड़, 
किचन में गर्मी में तप कर 
हरी सब्ज़ियाँ बनाती फिरती हैं।
बच्चे मुँह बिचकाकर 
नाराज़गी दिखलाते हैं सो अलग,
फिर भी बाज नहीं आती।

! ये महिलाये भी न, 

जब किसी बात पे दिल दुखे ,
तो घर मे अकेले में आँसुओं 
की झड़ी लगा देगी।
लेकिन बाहर अपनी सहेलियों के 
सामने तो ऐसे मुस्कुरायेगी,
जैसे उसके जितना 
सुखी कोई नहीं।

! ये महिलाये भी न,

जब कभी लड़ लेगी पति से,
तो सोच लेगी अब मुझे 
तुमसे कोई मतलब नहीं।
लेकिन शाम में जब घर आने में 
पति महाशय को देर हो जाये,
तो घड़ी पे टक-टकी 
लगाए रहेगी।
और बच्चों से बोलेगी,
"फोन कर के पापा से पूछो 
आये क्यों नहीं अभी तक?"

अरे यार...ये महिलाये भी न,



तिनका तिनका जोड़कर 
अपने आशियाने को बनाती 
और सजाती हैं,
चलती और ढलती रहती 
है सबके अनुसार।
लेकिन कभी एक कदम भी 
बढ़ा ले अपने अनुसार,
तो "यहाँ ऐसे नहीं चलेगा
जाओ अपने घर (मायका)
ये सब वहीं करना।"
सुन रो रोकर 
सोचती रहती है,
अब मैं इस घर में नहीं रहूँगी।
रात भर आँसुओं से 
तकिया गीला कर,
उल्लू की तरह 
आँखें सूजा लेती हैं।
अगले दिन फिर से 
सुबह उठकर
तैयार करने लगती है,
बच्चों की टिफिन और 
सबके के लिए नाश्ता।
बदलने लगती है 
ड्राइंग रूम के कुशन कवर, 
और फिर से सींचने लगती है
अपने लगाए पौधों को।
सच में एकदम पागल है!
सोचती कुछ है और 
करती कुछ!

 ये महिलाये भी न....?

महिला शक्ति को नमन🙏🙏
प्रतिदिन सुबह और रात्रि मे सुविचार कहानी प्राप्त करने के लिए
 🪀 *व्हाट्सएप ग्रुप*🪀

अपने दोस्तों और रिश्तेदार तक जरूर शेयर करना!
नोट:-अगर लिंक पर क्लिक करने पर ग्रुप फूल हो गया हो तो आप मेरे नंबर (Join) पर Msg. करे, में आपको अन्य ग्रुप में स्थान दे दूंगा Click:- https://wa.me/919173366515

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.