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मेरी बेटी मेरे साथ है,अब तो मैं ठीक हो ही जाऊंगा | Meri Beti Mere Sath Hindi Story

 मेरी बेटी मेरे साथ है,अब तो मैं ठीक हो ही जाऊंगा  💓




हॉस्पिटल के बाहर बैठी नीता- आज खुद को बहुत अकेला महसूस कर रही थी।

         आंसू थे कि रूकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। कल तक घर का क्या माहौल था!


               और आज क्या माहौल हो गया, कुछ समझ में ही नहीं आया। जो था वह हाथों से फिसलता जा रहा था।

           बस! कोशिश में थी- कि जो बचा खुचा रह गया- उसे ही समेट लूँ।

          किस्मत कैसे कैसे दिन दिखाती है। कल तक नीता अपनी बेटी निधि की सगाई की तैयारियों में लगी हुई थी,पर आज,आज अपने पति (विजय जी ) को बचाने की कोशिश में। जो जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे। हार्ट अटैक था, पर इसका कारण....?     

              निधि इतना कुछ बोल जाएगी,उसे उम्मीद नहीं थी। आखिर कहाँ कमी रह गई..?

          इतने सालों में जो कुछ नीता के साथ बीता था, वह सब फ्लैश बैक की तरह उसके सामने आ रहा था। जब नीता अजय की दुल्हन बनकर ससुराल आई थी।

    अजय के परिवार में उसके माता-पिता और उसके दो छोटे भाई थे अनिल और विजय। नीता इतनी प्यारी थी कि उसे ससुराल में अपनी जगह बनाने में भी ज्यादा वक्त नहीं लगा। हर कोई नीता को पसंद करता था और नीता भी सबका ध्यान रखती थी।

                   अजय और अनिल जहां अपने पिता का व्यवसाय देखते थे,वही विजय अभी कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था। वह नीता से तीन साल छोटा था। पर नीता से अपने दिल की हर बात शेयर करता था।

         एक साल बाद ही नीता एक प्यारी सी बच्ची की मां बनी। उसका नाम उन्होंने निधि रखा।

             कुछ साल बाद अनिल की भी शादी हो गई- और देवरानी भी घर आ गई। सब कुछ बहुत अच्छे से चल रहा था।

              अब पिताजी ने विजय के लिए भी लड़की देखना शुरू कर दिया था।

              अब तो नीता और उसकी देवरानी को पूरा मौका मिल गया था- विजय की टांग खींचने का।

                आखिर देवर भाभी का रिश्ता होता ही ऐसा है। अब तो रोज ही घर ठहाको से गुँजने लगा था।

      लेकिन कहते हैं ना जिंदगी कभी एक जैसी नहीं होती। कब हंसी खुशी के माहौल को गमगीन माहौल में बदल दे,पता ही नहीं चलता।

           एक रात अजय घर लौट रहा था- कि तेज रफ्तार ट्रक ने उसकी जिंदगी को लील लिया।

                 नीता का तो जैसे सब कुछ ही खत्म हो गया था। बिल्कुल सोचने समझने की हिम्मत ही खत्म हो चुकी थी। नीता की कोई इतनी ज्यादा उम्र भी नहीं थी और घर की इज्जत घर में ही रह जाए इसलिए कुछ दिनों बाद उसके माता-पिता और उसके सास ससुर की मर्जी से नीता का विवाह उसके छोटे देवर विजय से कर दिया गया।

          लेकिन निधि जहां पहले 'विजय चाचा,विजय चाचा' कहकर उसके आस पास मंडराया करती थी! अब वह उससे दूर रहने लगी थी।

     चुप चुप सी रहने लगी थी। किसी भी चीज की जरूरत होती- तो सिर्फ नीता से कहती। कई बार विजय ने भी इस बारे में बात करनी चाही, लेकिन निधि ने कुछ नहीं कहा।

      वह अभी बच्ची है, यही सोचकर किसी ने ध्यान भी नहीं दिया।

         लेकिन जब नीता दोबारा मां बनी- तो निधि पूरी तरह से ही बदल गई। उसे ऐसा लगने लगा था कि अब उससे उसकी मां भी छीन ली गई है।

          वह बहुत जिद्दी हो गई थी। वह अपनी छोटी बहन- राम्या के साथ ढंग से पेश नहीं आती। चीखना चिल्लाना उसकी आदत में शुमार हो चुका था।कई बार वह उस पर हाथ तक उठा देती थी, जिससे परेशान होकर नीता ने निधि को उसकी नानी के पास भेज दिया। 


          इसके बाद तो वह विजय से नफरत ही करने लग गई।

          हालांकि विजय ने नीता के फैसले को गलत ही कहा: लेकिन निधि को यही लगा- कि विजय के कहने पर ही नीता ने यह सब किया है।

          हालांकि विजय ने कभी भी पिता के फर्ज से मुंह नहीं मोड़ा।

            वक्त यूँ ही पंख लगा कर उड़ गया- और निधि अब अपनी काॅलेज की पढ़ाई खत्म कर जॉब करने लगी थी।

          अब उसकी शादी की बात चलने लगी थी। फाइनली निधि को रमन पसंद आया।

              और सगाई की तैयारियां शुरू हो गई। नीता सगाई पास ही के गार्डन से करवाना चाहती थी, वही निधि सगाई होटल में करवाना चाहती थी।    

           सगाई होटल से हो या गार्डन से,इसी बात को लेकर निधि और नीता में बहस हो गई।

    "क्या मम्मी!,शादी मेरी है- कम से कम मेरी मर्जी तो चलने दो"

              "देख! शादी के लिए हम होटल बुक कर लेंगे- लेकिन फिलहाल सगाई तो हम पास के ही गार्डन से करेंगे"

         " यार! आप प्लीज जबरदस्ती मत करो! इससे तो सगाई घर पर ही करवा लो"

     "निधि! अभी सगाई में इतना खर्चा करने की क्या जरूरत है!"

             "हां,मेरे पर तो खर्च करने में आप लोगों का काफी खर्चा हो जाता है।

 शादी में भी खर्चा क्यों कर रहे हो...? किसी सम्मेलन में ही करवा देते। आपकी तो सिर्फ एक ही बेटी है राम्या, मैं तो कुछ हुँ ही नहीं"

      "अरे किसने कहा- कि तुम हमारी बेटी नहीं हो। तुम तो हमारी लाडली बेटी हो" विजय ने कहा!

           "आप तो रहने ही दीजिए। सब जानती हूँ मैं, कि जुबान मेरी मां की है, लेकिन बोल कौन रहा है....? क्या मुझे नहीं पता आपने क्या-क्या छीना हैं मुझसे.. .!"

        "मैंने क्या छीन लिया तुमसे बेटा.... ? आखिर मैं पिता हूँ तुम्हारा!"

         "आप मेरे पिता बनने की कोशिश मत कीजिए।

  आप शायद भूल रहे हैं कि‐ मैं आपके बड़े भाई की बेटी हूं!

 मेरे पिता इस दुनिया में नहीं है!

   और रही छीनने की बात- तो आपने मुझसे मेरी मां तक को छीन लिया"

     इतना सुनना था-कि नीता ने खींचकर एक चांटा निधि के गाल पर जड़ दिया।

     लेकिन इतने पर भी वह चुप नहीं हुई। आज तक उसके दिल में जो भी भरा था,सारी भड़ास उसने उस समय निकाल दी।

      थोड़ी देर बाद विजय जी अचानक से गिर गए। उन्हें हॉस्पिटल लाया गया- तो पता चला कि हार्ट अटैक है- और उनकी हालत क्रिटिकल है।

      नीता यह सब सोच ही रही थी- कि इतने में निधि और राम्या भी हॉस्पिटल आ गई। उन्हें देखकर नीता ने कहा:

      "निधि, तुम जाओ यहाँ से!

ICU- में जो शख्स हैं- वो मेरा पति और राम्या का पिता है! पर तुम्हारा कुछ नहीं।  वह शख्स,जिसने हमारी खुशी के लिए अपने अरमानों को छोड़ दिया। क्या उसके शादी और अपने लाइफ पार्टनर को लेकर कोई अरमान नहीं थे, जो उसने एक विधवा,एक बच्ची की मां से शादी कर ली। वो तो तुम्हारा पिता बन गया,लेकिन तुम उसकी बेटी नहीं बन पाई!"

        " मुझे माफ कर दो माँ, मुझसे गलती हो गई "

       "माफी मुझसे क्यों मांग रही हो...? उससे मांगो- जिसका दिल दुखाया है तुमने! अगर उन्हें कुछ हो गया- तो मैं तुम्हें कभी माफ नहीं कर पाऊंगी"! थोड़ी देर बाद नर्स ने आकर कहा: कि विजय जी को होश आ गया है- और वे निधि को याद कर रहे हैं। वह कमरे में गई तो विजय जी उसको देख कर मुस्कुरा दिए।

         "निधि,मैं ठीक हूँ बेटा! तुम्हारी सगाई मैं होटल से ही करवाऊँगा"!

         "मुझे माफ कर दो पापा! मुझसे गलती हो गई,आप ठीक हो जाओ बस यही काफी है"

               निधि के मुँह से अपने लिए- "पापा " सुनकर वह बहुत खुश हुए।

        "बस मेरी बेटी मेरे साथ है,अब तो मैं ठीक हो ही जाऊंगा"

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