संघर्ष की मिट्टी
रामलाल एक बड़ी कंपनी के मालिक थे। एक दिन वे अपने ऑफिस की कैंटीन में साधारण कर्मचारियों के साथ बैठकर खाना खा रहे थे। उनके साथ काम करने वाला एक नया लड़का, विकास, यह देखकर हैरान हुआ।
विकास ने पूछा, "सर, आप तो मालिक हैं। आप ऊपर के AC कमरे में क्यों नहीं खाते?"
रामलाल मुस्कुराए और बोले, "बेटा, बीस साल पहले मैं भी इसी कैंटीन में बैठकर खाना खाता था, तब मैं यहीं का एक मामूली कर्मचारी था। फर्क सिर्फ इतना है कि आज मेरी कुर्सी बदल गई है, पर मेरी जड़ें नहीं बदलीं।"
विकास चुप हो गया। रामलाल ने आगे कहा, "जो व्यक्ति अपनी शुरुआत भूल जाता है, वह अक्सर अपना रास्ता भी भूल जाता है। मैं हर हफ्ते यहां इसलिए आता हूं ताकि याद रहे कि मैं कहां से चला था।"
उस दिन के बाद विकास ने भी अपने काम को उतनी ही ईमानदारी से करना शुरू कर दिया, जितनी शुरुआत में की थी।
सीख: सफलता चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अपनी जड़ों और संघर्ष के दिनों को कभी मत भूलिए — यही आपको ज़मीन से जुड़ा रखता है।


